आर्थिक मंदी अपने पैर कहा तक पसारेगी - डा. संदीप कटारिया

क्राइम रिफॉर्मर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ . संदीप कटारिया ने बताया कि आर्थिक मंदी का असर देश की अर्थव्यवस्था में नई नई शक्ल में सामने आ रहा है। ऑटो उद्योग बीते दो दशक की सबसे बड़ी मंदी की चपेट में है और अब बाकी क्षेत्र भी इसकी चपेट में आते दिख रहे हैं। ऊपर से अंतरराश्ट्रीय बाजार में तेल के बढ़ते दाम नई चुनौती की तरह सामने आए हैं। बीते एक हफ्ते से लगातार पेट्रोल, डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। जनवरी के बाद पेट्रोल डीजल के दाम में एक हफ्ते में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई। उधर बुनियादी ढांचों से जुडी परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार और डरा रही है। सरकार की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक डेढ़ सौ करोड़ रूपये से ज्यादा बजट वाला हर तीसरा प्रोजेक्ट लटका हुआ है। इस सबके बीच बीते दो कारोबारी दिनों से शेयर बाजार झूम कर नाच रहा है। दो दिन में सेंसेक्स 3000 अंक ऊपर चढ़ गया है। जानकार बता रहे हैं कि ये कॉर्पोरेट टैक्स घटाने का असर है। लेकिन ये खुशी कितने दिन की है और आम आदमी को इससे कितना फायदा होगा कहना मुष्किल है। कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती के केंद्र सरकार के ऐलान के बाद से शेयर बाजार आसमान में झूम रहा है। मंदी की आशा से सहमी हुई कई कंपनियों के स्टाक में जबरदस्त उछाल देखा गया। निवेषकों को बाजार में 10.5 लाख करोड़ रूपये का फायदा हुआ है। कुछ जानकारों के मुताबिक काफी समय से थमे हुए बाजार में तेजी अभी ओर देखने को मिलेगी। यह पहली बार भरोसा दे रहा है कि सभी बातों पर ध्यान दिया जा रहा है तेजी अभी रूकने वाली नहीं है। अभी तो बस शुरूआत हुई है। शेयर बाजार में अचान त्योहार जैसी खुषी अचानक ही दिख रही हो लेकिन तेल का बाजार डरा रहा है। सऊदी अरब में तेल रिफाइनरी में आतंकी हमलों के बाद लगातार अंतरराश्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ रही है। जिसका सीधा असर भारत में पेट्राल व डीजल पर दिख रहा है। सोमवार को पेट्रोल 29 पैसे प्रति लीटर व डीजल 19 पैसे प्रति लीटर मंहगा हुआ। मार्च के बाद डीजल के बाद सबसे अधिक है। पेट्रोल के दाम 10 महीनों में सबसे ज्यादा हो गए है। हफ्ते में पेट्रोल 1.88, डीजल 1.50 रू प्रति लीटर महंगा हो गया है। जनवरी के बाद एक हफ्ते में सबसे ज्यादा बढ़त है। वहीं लोगों ने बताया कि पेट्रोल की बढ़ती हुई कीमतें हमें परेषान कर रही है। सड़कों की हालत खस्ता हाल है। जबकि पेट्रोल, डीजल बढ़ते जा रहे है। बढ़ती हुई कीमतें से आम जनता परेषान हो रही है।


डॉ. कटारिया ने बताया कि पिछले कई हफ्तों से फाइनेंस मंत्री तरह-तरह की रिफोर्म की एलाउंसमेंट करती रही है। जिसकी वजह से “ोयर बाजार में तेजी दिखने को मिल रही है। क्या यह तेजी ऐसी ही चलती रहेगी या नहीं यह केवल अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल पर डिपेंड करता है। तेल की कीमतों के अलावा भी अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां कम नहीं है। अंतरराश्ट्रीय आर्थिक मंदी की आहत देश में कई कारोबारियों को अपना कारोबार समेतने को मजबूर कर रही है। आटो उद्योग मंदी की गिरफ्त में सबसे तेजी से आया है और बता रहा है कि दिखावे के कुछ बदलावों के बजाय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुछ मूलभूत उपाय करने होंगे। अर्थव्यवस्था में छा रही मंदी का असर बुनियादी सेक्टर पर भी साफ दिख रहा है। सांखिकी मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक मंदी के दौर में इस साल मई तक लाखों करोड़ रूपये इंफ्रास्ट्रकचर सेक्टर में  फंसे हुए है और परियोजनाएं तय समय से काफी पीछे चल रही है। केंद्र सरकार की 150 करोड़ से ज्यादा की 1623 में से 496 परियोजनाएं तय समय से पीछे चल रही है। सरकार की 30.56 फीसदी परियोजनाएं हर तीन में से एक परियोजना लटकी पड़ी है। सबसे ज्यादा देरी सड़क परिवहन और हाइवे सेक्टर में है जहां 810 में से 216 परियोजनाएं अटकी हुई है। परियोजनाओं के अटकनें से सिर्फ विकास का काम ही सिर्फ धीमा नहीं पड़ा है। बल्कि सरकार का खर्च पोनै चार लाख करोड तक बढ़ गया है। इन परियोजनाओं के लिए 19.25 लाख करोड़ रूपये रखे गए थे। देरी के कारण खर्च बढ़कर 23.02 लाख करोड़ हो गया है। यानी 3.77 लाख करोड़ ज्यादा खर्च हो रहे है। बुनियादी सेक्टरों से जुड़ी परियोजनाओं में देरी की कई वजह है जैसे जमीन अधिग्रहण व वन विभाग से मंजूरी में देरी। सामन की सप्लाई में देरी, फंड्स की कमी, माओवादी कानून व्यवस्था की जैसी समस्याएं है। इन समस्याओं को जल्द पूरी किया जाए ताकि बुनियादी सेक्टरों में निवेश का रास्ता भी जल्दी साफ हो सके।


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