चमत्कार के पीछे मत भागो, सुख स्वयं में ही मिलेगा - डॉ. संदीप कटारिया

 








क्राइम रिफॉर्मर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संदीप कटारिया ने बताया कि चमत्कार के प्रति मानव हृदय सहज आकर्शित होता है। लोग चमत्कार देखना चाहते हैं, पर उन्हें नहीं मालूम कि असली चमत्कार क्या होता है। गायें हरी घास खाती हैं और सफेद दूध देती हैं। इसे लोग चमत्कार नहीं मानते हैं, पर पत्थर से अगर दूध निकल आए तो यह चमत्कार है। तुम्हारा घर ईंट-पत्थर का बना है। अगर ईंटो से दूध निकलने लगे, फर्ष से दूध निकलने लगे, छत से दूध निकलने लगे, दीवारों से दूध निकलने लगे तब क्या करोगे? भगवान से प्रार्थना करोगे, 'हे भगवान! यह क्या हो रहा है? मेरे घर में नहीं, कहीं दूसरी जगह करो यह चमत्कार। यहां तो मैं रह भी नहीं सकता हूं। सारी छट टपकती है। घर में खाना भी नहीं बन पाता है। पलंग भी भीगा हुआ है, भगवान यह क्या हो रहा है?'


क्या है असली चमत्कार? अगर तुम चमत्कार को देखना चाहते हो तो अपने इस “वास को देखो। यह है असली चमत्कार! इसे दुनिया की दौलत से नहीं खरीदा जा सकता। इस “वास को समझने की कोशिश करो। अपने जीवन को समझने की कोशिश करो। आज तुम जीवित हो तो इसका मतलब कि यह “वास तुम्हारे अंदर आया और फिर चला गया? यह आएगा, जाएगा और फिर नहीं आएगा।


जीवन में यही होता है। “वास से मूल्यवान इस दुनिया में कुछ भी नहीं है। चाहे करोड़पति हो या भिखारी, शिक्षित हो या अशिक्षित, दुनिया का सारा चक्कर इसके साथ ही खत्म हो जाएगा। अगर इस “वास को नहीं समझ पाए तो जो यह अनमोल उपहार मिला है वह भी हाथ से निकल जाएगा।


अगर असली चमत्कार को समझना चाहते हो तो अपने अंदर, अपने हृदय की तरफ देखो। यह चमत्कार बाहर नहीं मिलेगा। यह चमत्कार तुम्हारे अंदर हो रहा है, जिसकी तुम्हें तलाष है। वह किसी से बैर नहीं करता, चाहे तुम्हारा सब कुछ समाप्त हो जाए।


मनुश्य एक ऐसा यंत्र है, जिसके रोम-रोम में एक ही याचना है। वह है जीवन में आनंद और संतुश्टि पाने की। वह सुख-चैन और परम आनंद का अनुभव कर सके। इस मनुश्य चोले के अंदर एक ऐसी चीज रखी हुई है, जो अनंत है। सभी जीवों का प्राण है। सुखमय और आनंददायक है। उस चीज को पहचानो।


आज तक तो तुमने अपने जीवन में सिर्फ कमियों को ही पहचाना है। अब अपने जीवन के अंदर जो पूर्ति है, इसको भी पहचानना  “ाुरू करो। अभी तो तुमने सिर्फ यह पहचाना है कि तुम्हारे पास क्या नहीं है! अब अपने जीवन में उस चीज को पहचानना “ाुरू करो कि तुम्हें क्या-क्या मिला है। एक नहीं तुम्हें अनेकों अनमोल उपहार मिले हैं!


जब मनुश्य अपने ख्यालों को छोड़कर असलियत को समझने लगेगा तो उसके जीवन में आनंद ही आनंद हो जाएगा। शांति कोई फिलॉसफी नहीं है, शांति अनुभव करने की चीज है। जब तक शांति का अनुभव नहीं हो जाएगा, तक तक सारी बातें अधूरी ही रहेंगी। शांति का अनुभव करने की किसको जरूरत है? शांति का अनुभव करने की जरूरत तुम्हें है, सभी मनुश्यों को जरूरत है। आज का मनुश्य अपनी त्रुटियों को नहीं देखता है, बल्कि दूसरे की त्रुटियों को देखता है और अशांत रहता है।








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