शाहिद कपूर की 'कबीर सिंह' इश्क और बर्बादी का बेमजा कॉकटेल है 

Kabir Singh Movie Review: 'कबीर सिंह' तेलुगू की सुपरहिट फ़िल्म 'अर्जुन रेड्डी (Arjun Reddy)' की रीमेक है और फिल्म के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा ही हैं जिन्होंने तेलुगू वर्जन को डायरेक्ट किया था. जानें कैसी है शाहिद कपूर (Shahid Kapor) की फिल्म...






 


नई दिल्ली: 

Kabir Singh Movie Review: 'कबीर सिंह' तेलुगू की सुपरहिट फ़िल्म 'अर्जुन रेड्डी (Arjun Reddy)' की रीमेक है और फिल्म के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा ही हैं जिन्होंने तेलुगू वर्जन को डायरेक्ट किया था. फिल्म की कहानी कबीर सिंह शाहिद कपूर (Shahid Kapoor) की है जिसे मेडिकल कॉलेज की अपनी जूनियर प्रीति यानी कियारा आडवाणी (Kiara Advani) से इश्क हो जाता है. इश्क भी ऐसा वैसा नहीं घनघोर वाला. इस इश्क में कुछ ऐसा होता है कि कबीर सिंह टूट जाता है. 'कबीर सिंह (Kabir Singh)' की दिक्कत उसका गुस्सा है. यही ग़ुस्सा और घनघोर इश्क उसे खुद को तबाह करने के लिए मजबूर कर देता है. कबीर सिंह का फर्स्ट हाफ जहां शाहिद कपूर और कियारा आडवाणी के इश्क पर फोकस्ड है वहीं सेकंड हाफ शाहिद कपूर के खुद को तबाही की राह पर ले जाने को दिखाता है. जिसमें शाहिद कपूर यानी कबीर सिंह शराब, ड्रग्स और हर गलत काम करता नजर आता है.


'कबीर सिंह (Kabir Singh )' की लंबाई तंग करने वाली है और थकाने वाली भी. फिर 'कबीर सिंह (Kabir Singh)' जिस तरह से प्रीति के साथ पेश आता है, वह भी थोड़ा अजीब है. प्रीति की खामोशी क्यूट कम इरिटेटिंग ज्यादा है. 'कबीर सिंह' की एडिटिंग बेहद कमजोर है. फिल्म 40-45 मिनट खींची हुई है. शाहिद कपूर ने ठीक-ठाक एक्टिंग की है लेकिन 'अर्जुन रेड्डी' विजय देवराकोंडा (Vijay Deverakonda) को मैच नहीं कर पाते. कियारा आडवाणी ने ठीक-ठाक रोल किया है लेकिन कुछ भी याद रखने लायक नहीं है. फिर शाहिद और कियारा की जोड़ी स्क्रीन पर वो स्पार्क पैदा नहीं कर पाती है जो शालिनी पांडेय और विजय देवराकोंडा की जोड़ी ने पैदा किया.


'कबीर सिंह (Kabir Singh )' का म्यूजिक इसकी यूएसपी है. फिल्म का म्यूजिक दिल में उतर जाने वाला है. संदीप रेड्डी वांगा (Sandip Reddy Vanga) ने 'कबीर सिंह' को पूरी तरह से 'अर्जुन रेड्डी' की तरह बनाया है, यानी एक-एक फ्रेम कॉपी है. ऐसे में 'कबीर सिंह' बनाने का कोई औचित्य नजर नहीं आता है क्योंकि तेलुगू की कल्ट फिल्म हिंदी में आकर पूरी तरह पस्त हो जाती है. 'अर्जुन रेड्डी' को हिंदी में डब करना ज्यादा बेहतर ऑप्शन था.


'कबीर सिंह (Kabir Singh )'  का बजट लगभग 60 करोड़ रुपये बताया जा रहा है जबकि तेलुगू फिल्म 'अर्जुन रेड्डी' का बजट लगभग 4-5 करोड़ रुपये था और फिल्म ने 51 करोड़ रुपये की कमाई की थी. यहां यह बड़ा सवाल है कि क्या शाहिद कपूर की 'कबीर सिंह' इस पेस के साथ इस तरह की सफलता हासिल कर पाएगी.



Popular posts