भारत पुकार रहा है, अपने इतिहास को पहचानो - डॉ. संदीप कटारिया

क्राईम रिफार्मर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संदीप कटारिया ने एक बयान में बताया कि आज हमारा देश प्रगति-पथ पर दौड़ रहा है। अब मोटर कार तो क्या हवाई जहाज, युद्ध, टैंक और मिसाईल तक भारत में बनने लगी हैं। आंकड़े पेष किये जा रहे हैं कि अमुक उत्पादन में हमारा देश फलां नम्बर पर पहुंच गया है। अमुक उत्पादन में फलां नम्बर पर। आंकड़ों के इस मकड़जाल में फंसकर आज हर नागरिक अपने देश पर गर्व कर रहा है।


लेकिन ये सिर्फ आंकड़े हैं और आंकड़े सदा यथार्थ से परे होते हैं। आज हम प्रगति नहीं कर रहे हैं, बल्कि बर्बादी के रास्ते पर जा रहे हैं। क्योंकि आंकड़ों से हटकर यदि हम देखें, तो यर्थार्थ इससे बिल्कुल भिन्न है। इसके लिये कुछ ही उदाहरण काफी होंगे। हम रोज अखबारों में पढते हैं बलात्कार, जातीय हिंसा और बड़े-बड़े घोटाले। इस कार्य में लिप्त भी पाये जाते हैं देश के बड़े-बड़े सम्मानित नागरिक व देश के नेतृत्व को संभालने वाले लोग।


डॉ. कटारिया ने कहा अब प्रश्न  उठता है कि हम मान लें कि हमारा देश प्रगति कर रहा है या आगे बढ रहा है। यदि ध्यान से सोचा जाये, तो इसका उत्तर हमें नकारात्मक ही मिलेगा। क्योंकि हमने बड़ी-बड़ी फैक्टरियां लगाई, बड़े-बड़े कारखाने लगाये, हम हवाईजहाज, युद्धटेंक व ऐशो-आराम की बड़ी-बड़ी वस्तुएं तो बनाने लगे। लेकिन मेरे देश में कोई ऐसी फैक्टरी, कोई ऐसा कारखाना नहीं, जिसमें इंसान बनाये जाते हों, मनुश्य बनाये जाते हों। जिस मनुश्य के लिये ये सब कुछ बनाया जा रहा है, वह मनुष्य नहीं बनाया गया। कोई ऐसी फैक्टरी मेरे देश में नहीं लगाई गई जिसमें नैतिकता, देश-प्रेम, चरित्र-निर्माण की वस्तुएं बनाई जाती हों।


इसी सबका परिणाम है कि राम और कृष्ण का यह देश नैतिक पतन की चरम सीमा तक पहुंच चुका है। आज इस देश के लोगों के पास न तो कोई चरित्र है, न देश-प्रेम और न ही भाई-चारा, जो कि इस देश के समाज की सबसे बड़ी विषेशता तथा संपत्ति होती थी। आज सारा देश भ्रश्टाचार, जातीय वैर-भाव व नफरत की आंधी में झुलस रहा है। इस सबका उत्तरदायित्व है उन लोगों पर, जो कि अपने आपको राम और कृश्ण के उत्तराधिकारी बताते हैं। जिस राम और कृश्ण ने अपनी सभ्यता, संस्कृति और धर्म को बचाने के लिए युद्ध किये, आज उनके तथाकथित उत्तराधिकारी इन सब मर्यादाओं को खत्म करने के लिए युद्ध छेडे हुए हैं।


विश्व को मनुर्भव का सन्देश देने वाला यह देश आज स्वयं मनुष्यता से दूर होता जा रहा है। आज हम अपने सब आदर्ष और सिद्धान्त भूलकर भौतिकता के पीछे भाग रहे हैं। जब पष्चिम के देश भौतिकता से तंग आकर आध्यात्मिकता की ओर झुके हैं, तब हमारा भौतिकता की दलदल की तरफ आकर्शण एक खतरनाक संकेत है। इसका लाभ भी आसुरी शक्तियां उठा रही हैं। आज हमारा समाज संस्कारविहीन व दिग्भ्रमित होता जा रहा है। किसी को नहीं मालूम कि माता-पिता, भाई-बहन, गुरू आदि के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। आज प्रगति की अन्धी दौड में सब रिष्ते-नाते भुला दिये गये हैं। बेटा बाप को काट रहा है व बाप बेटे को और भाई भाई का कत्ल कर रहा है। आज आदमी अपने अस्तित्व को भूल चुका है और उसे अब अपनी छाया से भी डर लगने लगा है।


सुभाशचंद्र बोस, लाला लाजपतराय, सरदार भगतसिंह, चंद्रषेखर आजाद, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, पं. रामप्रसाद बिस्मिल, राजगुरू, सुखदेव, वीर सावरकर, चाफेकर बन्धु जैसे बलिदानियों तथा असंख्य क्रांतिकारियों ने अपने अस्तित्व को मिटाकर देश को आजादी दिलाई थी। इन्होेंने देश व समाज को व्यक्तिगत हितों से सदा ऊपर समझा था। लेकिन हमारे बलिदानियों ने स्वाधीनता संग्राम के समय जो कश्ट सहे थे, उन सबको हमने बहुत ही जल्दी भुला दिया। विश्व इतिहास में शायद ही कोई उदाहरण हो, जब किसी देश में अपनी स्वतन्त्रता के बाद गुलामी के समय सहे कष्टों को इतनी जल्दी भुला दिया गया हो।


लेकिन अभी भी समय है, जब हम सम्भल सकते हैं। इसके लिए आवष्यक होगा कि हम अपने गौरवमय इतिहास को पहचानें तथा उसी रास्ते पर चलें, जिस पर चलकर हमारे पूर्वजों ने भारतीय सभ्यता और संस्कृति को विष्व में प्रतिश्ठित किया था। अब समय आ गया है, जब हम खुद जगकर नई पीढ़ी को जगायें तथा उन्हें संस्कारित करें। देशवासियो अब उठो! अपने प्यारे भारत की करूण पुकार को सुनो। वह तुम्हें बार-बार पुकार रहा है। उठो और अपने आपको पहचानो।


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