व्यक्तित्व विकास के लिए सहना और तपना पड़ता है - डा. संदीप कटारिया

क्राइम रिफॉर्मर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संदीप कटारिया ने बताया कि अनूठा रचने एवं तरक्की करने वाले लोगों की विषेशता होती है कि उनमें हर परिस्थिति और चुनौती को झेलने की क्षमता होती है। सबसे अधिक उन्हें अपने ही लोगों की खड़ी की गई बाधाओं, कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करना होता है। यह एक सार्वभौम नियम है। कुछ सही हालात का इंतजार करते रह जाते हैं तो कुछ कैसे भी हालात में अपने मन का सुकून बनाए रखने में कामयाब रहते हैं। मोटिवेषनल स्पीकर लिओ बबौटा कहते हैं, 'जिंदगी में शांति हालात को ठीक करने से नहीं मिलती, बल्कि यह जान लेने से मिलती है कि आप भीतर से क्या हैं।'


डा. कटारिया ने बताया कि कुछ लोग कठिनाइयों के काँटों से घबराकर मार्ग बदलते रहते हैं। पर वे अपने जीवन में कभी भी शांति और सफलता के दर्शन नहीं कर सकते। जहां किसी प्रकार की कठिनाई और समस्या नहीं हो, इस प्रकार के जीवन की कल्पना एक दिवास्वप्न है। हर किसी को अपना दुख बड़ा और दूसरे का मामूली लगता है। हम दूसरों के सुख तो देख पाते हैं, उनके संघर्श नहीं। हम दुख को पकड़े रहते हैं और दुख हमें। हमारी भीतरी आवाजें हमें लाचार ही बनाए रखती हैं। इसलिए चिकार विंसेंट वैन गॉग ने कहा है कि 'अगर आपकी भीतरी आवाज कहती है कि आप पेंटिंग नहीं कर सकते, तो किसी भी सूरत में आप पेंट करें, आप पाएंगे कि वे आवाजें खुद ब खुद चुप हो रही हैं।' जिनकी मनोवृति सुविधावादी हो जाती है उनके लिए छोटी-सी प्रतिकूलता को सहना कठिन हो जाता है, नई रचना असंभव हो जाती है।


जितने भी महापुरूश हुए हैं, उन्होंने नाना प्रकार के अवरोधों और संघर्शों का सामना किया है। जिस प्रकार अग्नि में तपने से रोने की आभा में नया निखार आता है, उसी प्रकार संघर्शों की आग में उनका आभामंडल और अधिक तेजस्वी और प्रभावषाली हो जाता है। आज हर व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास चाहता है। इसके लिए सहना और तपना जरूरी है। अंग्रेजी भाशा का प्रसिद्ध वाक्य है-'फस्र्ट डिजर्व, देन डिजायर' पहले योग्य बनो, बाद में सफलता की कामना करो। जीवन में बहुत कुछ बेहतरीन होना बाकी है। कई खूबसूरत लम्हें रास्ते में हमारी प्रतिक्षा में हैं। हमारी कई उम्मीदों को अभी उड़ान भरनी है। कई अजूबों से मुलाकात होनी है। कई सुख बाहें फैलाए खड़े हैं। पर समस्या यह है कि हम सुध-बुध खोकर जिए जा रहे हैं। दुनिया हमारी ओर मुंह किए खड़ी है और हम कहीं और ही उदास-निराष बने खड़े हैं। अपने भरोसे को मजबूत बनाएं, दुनिया में बहुत कुछ आपके लिए है।


डा. संदीप कटारिया ने बताया कि सबके जीवन का एक अनूठा उद्देष्य होता है और उस उद्देष्य को ढंूढना तथा उसका अनुसरण करना ही अपने लिए एक खुषहाल, पूर्ण, सार्थक और संतोशप्रद जीवन के निर्माण की कुंजी है।' हालांकि कभी-कभी किन्हीं कारणों से, अनजाने ही हम जीवन के उद्देष्य से दूर हो जाते हैं, भटक जाते हैं। हर व्यक्ति के मन में ऊंचाई पर पहुंचने का आकर्शण है, पर गहराई के बिना ऊंचाई भी वरदान नहीं होकर अभिषाप सिद्ध होती है। धैर्य-संपन्न मनुश्य अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थितियों में संतुलन करता हुआ लक्ष्य की ओर अग्रसर हो सकता है और वही शंकर की तरह विशपान कर समाज को अमृतपान कराताा है।