आक्रामक विदेश नीति से अलग-थलग पड़ा पाक - डा. संदीप कटारिया

 


जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और राज्य के पुनर्गठन के फैसले के बाद भारत ने दिखा दिया है कि पिछले पांच साल में वह विश्व  में कितना मजबूत बनकर उभरा है। यह नरेंद्र मोदी सरकार की कूटनीति और मजबूत विदेश नीति का ही परिणाम है कि पड़ोसी पाकिस्तान हर मंच पर कश्मीर का रोना रो रहा है और कोई उसकी बात तक सुनने को तैयार नहीं है। पाकिस्तान दुनिया के हर देश का दरवाजा खटखटा चुका है, लेकिन उसे कहीं से समर्थन नहीं मिला है। वो अलग-थलग पड़ गया है। पहले सुरक्षा परिशद और फिर यूएन मानवाधिकार परशिद में मुंह की खानी पड़ी है। यहां तक कि मुस्लिम देशों सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने भी पाक प्रधानमंत्री इमरान खान को भारत के साथ बातचीत शुरू करने की नसीहत दी है। यह भारत की सफल विदेश नीति का ही असर है कि मालदीव, नेपाल, म्यांमार, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान ने भी भारत सरकार के फैसले का समर्थन किया है। कुछ दिन पहले तक भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की बात करने वाला अमेरिका अब संयमित बयान दे रहा है। चीन ने भले ही इस मामले में जल्दबाजी में कूदने की कोशिश की, लेकिन भारत सरकार की मजबूत प्रक्रिया के बाद वो भी बैकफुट पर है। साफ है पाकिस्तान भले ही इस मामले पर अंतर्राश्ट्रीय मंचों पर कितना भी रोना रोए, लेकिन भारत की मजबूत विदेश नीति के कारण उसे दुनियाभर में कहीं से भी इस मामले में समर्थन नहीं मिलने वाला। यह सब भारत के राष्ट्रीय  सुरक्षा को विदेश नीति से जोड़ने के कारण संभव हो पाया है। एक दिन वो था जब हम हर आतंकी हमले के बाद पाक से कार्रवाई की गुहार लगाते थे और आज हम पीओके को भविश्य में भारत के हिस्से के तौर पर देख रहे हैं। यह हमारी विदेश नीति का ही असर है कि जलवायु परिवर्तन जैसे मु६े पर भारत को अहमियत दी जा रही है। अंतर्राश्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि मजबूत हुई। अंतर्राश्ट्रीय योग दिवस को मान्यता मिलने के दिन से ही यह असर नजर आ गया था। विदेश नीति के कारण ही पश्चिम  के देशों  में भारत की नई छवि बन रही है। इन देशों के साथ निवेश, सुरक्षा समेत तमाम प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है। आतंकवाद के खिलाफ भी सहयोग मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा अक्सर चर्चा में रही है। विपक्ष इस पर तरह-तरह के आरोप भ लगाता रहा है, लेकिन मोदी सरकार-1 के पिछले 5 साल और नरेंद्र मोदी सरकार-2 के 100 दिनों के कार्यकाल को देखें तो एक बात साफ है कि भारत की विदेश नीति में आक्रामक बदलाव आया है। सरकार दुनिया में बसे हर भारतीय नागरिक को ये विश्वास  दिलाने में सफल हुई है कि भारत सरकार उनके साथ है। जब भी विदेश में किसी भारतीय के साथ ज्यादती हुई या फिर मुसीबत आई तो सरकार तुरंत सहयोग के लिए आगे बढ़ी है। मुद्दा चाहे पाकिस्तान से गीता को वापस भारत लाने को हो, यमन में फंसे सात हजार लोगों को सुरक्षित निकालने का या फिर पाक जेल में बंद पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूशण जाधव की फांसी के खिलाफ अंतर्राश्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाने का, सरकार ने हर बार आक्रामकता से काम किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 69वे जन्मदिन पर गांधीनगर में  मां हीरा बेन का आशीर्वाद ले रहे थे तब विदेश मंत्री जयशंकर दिल्ली में नरेंद्र मोदी 2.0 के 100 दिनों की विदेश नीति की सफलता का मूल बता रहे थे। उत्साह से ओतप्रोत जयशंकर के अंदाज से साफ था कि अगले कुछ दिनों में विदेश नीति की सफलता के कई प्रमाण सामने आने वाले हैं। पीओके को भविश्य में भारत का भौगोलिक हिस्सा बताकर जयशंकर ने हर भारतीय के मन में अखंड भारत की अलग जगा दी है।


 


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