कालेधन पर मोदी सरकार को मिली बड़ी कामयाबी - डॉ. संदीप कटारिया

क्राइफ रिफार्मर एसोसिएशन  के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संदीप कटारिया ने बताया कि काले धन के खिलाफ लड़ाई में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को बड़ी सफलता मिली है। स्विस बैंक में जमा भारतीयों के काले धन से जुड़ा पहले दौर का विवरण स्विट्जरलैंड के संघीय कर प्रशासन ने भारत को सौंप दिया है, जिसमें सक्रिय खातों की भी जानकारी शामिल है। इसके अलावा जल्द ही सरकार को उन खातों की भी जानकारी मिल जाएगी, जिन्हें 2018 से पहले बंद कर दिया गया था। तय है कि काले कारोबारियों का यह काला चिट्ठा हाथ में आते ही सरकार इनके खिलाफ कड़ी कारवाई शुरू करेगी।



नरेंद्र मोदी सरकार गठन के दिन से ही काले धन के खिलाफ अभियान चलाए हुए है। इसी के तहत नोटबंदी की गई। अब सरकार उन सफेदपोषों पर षिकंजा करने की तैयारी में है जिन्होंने भारतीय धन को गलत तरीके से कमाकर विदेशी बैंकों में जमा कर रखा है या जमा रखा था। सरकार के पास यह जानकारी भी है कि भारतीय लोगों के कम से कम 100 ऐसे पुराने खाते भी हैं, जिन्हें 2018 से पहले ही बंद करा दिया गया। स्विट्जरलैंड इन खातों की जानकारियों को भी यथा शीघ्र साझा करने की प्रक्रिया में है। ये खाते वाहन कल-पुर्जा, रसायन, वस्त्र, रीयल एस्टेट, हीरा एवं आभूशण, इस्पात आदि कारोबार से जुड़े लोगों से संबंधित है। स्विस बैंकों से प्राप्त जानकारियों के विष्लेशण में उन सूचनाओं पर विषेश ध्यान दिया जा रहा है, जो राजनीतिक संपर्क रखने वाले लोगों से संबंधित हैं। नरेंद्र मोदी सरकार सबसे पहले राजनीति से काले चेहरों को बेनकाब करना चाहती है। हालांकि अभी तक न तो सरकार के पास और न ही किसी अन्य संस्था के पास ऐसी कोई जानकारी है कि विदेषी बैंकों में भारतीयों का कितना पैसा जमा है। 2004 से  2014 के बीच यूपीए सरकार के दौरान हुए खरबों रूपये के घोटाले सामने आने के बाद ऐसे अनुमान लगाए जाने लगी कि हमारी वार्शिक अर्थव्यवस्था के बराबर कालाधन विदेषी बैंकों में है। इसीलिए 2014 के चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बनकर उभरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही काले धन पर करारी चोट की। इसे अर्थव्यवस्था में वापस लाने के लिए एसआईटी का गठन, काला धन और कर आरोपण अधिनियम, बेनामी  लेन-देन निशेध कानून, स्विट्जरलैंड के साथ सूचना आदान-प्रदान का करार, मॉरीषस, साइप्रस व सिंगापुर के साथ कर संधियों में परिवर्तन, दोहरा कराधान परिहार करार, धन-षोशण निवारण अधिनियम यानी मनी लॉन्डरिंग ऐक्स पास किए गए। इसके अलावा अर्थव्यवस्था के शुद्धिकरण की दिषा में आगे बढ़ते हुए आठ नवंबर 2016 को विमुद्रीकरण  का कड़ा निर्णय किया गया और फर्जी लेन-देन में शामिल 1150 से अधिक पंजीकृत कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की गई। अब इन प्रयासों के परिणाम आने शुरू हो गए हैं। स्विस बैंक के आंकड़ों के अनुसार बैंक में धन जमा करने वाले देषों की सूची में भारत दुनियाभर में 74वें पायदान पर है। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच बैकिंग सूचनाओं के स्वतः आदान प्रदान के समझौते के एक सितम्बर से प्रभावी हो जाने के साथ ही भारतीयों के स्विस बैंक खातों के रहस्य पर पड़े पर्दे उघड़ने शुरू हो गए हैं। हालांकि अभी यह खुलासा नहीं हुआ है कि पहली सूची में शामिल कालेधन कुबेर कौन-कौन हैं। हां, इतना यह है कि सरकार जल्द ही इन पर नकेल कसने वाली है। यह जरूरी भी ताकि देश के धन को विदेशों में छुपाकर रखने वाले देशद्रोहियों को जेल की सलाखों तक पहुंचाया जा सके।


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