अयोध्या पर आया SC का फैसला,  पीएम मोदी बोले. अब वक्त भारतभक्ति का


 


अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्टन ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि रामलला विराजमान को सौंप दी है। वहीं मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ भूमि दी जाएगी। शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाडे का दावा कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि इसे किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 
डॉ. कटारिया ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। इसे हार या जीत के तौर पर न देखें रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियांे से मेरी अपील है कि शांति, सद्धाव और एकता बनाए रखें। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई वजहांे से महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि किसी विवाद को सुलझाने में कानूनी प्रक्रिया का पालन कितना अहम है। हर पक्ष का अपनी-अपनी दलील रखने के लिए पर्यापत समय और अवसर दिया गया। न्याय के मंदिर ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान कर दिया। यह फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं में जन सामान्य के विश्वास को और मजबूत करेगा। हमारे देश की हजारों साल पुरानी भाईचारे की भावना के अनुरूप हम 130 करोड़ भारतीयो को शांति और संयम का परिचय देना है। भारत के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अंतर्निहित भावना का परिचय देना है।
ऐतिहासिक फैसला देेते हुए कोर्ट ने कहा कि आस्था के आधार पर जमीन का मालिकाना हम नहीं दिया जा सकता। फैसला कानून के आधार पर ही दिया जाएगा। कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद का ढांचा गिरा दिया गया था। यह कानून का उल्लंघन था। रेलिंग 1886 में लगाई गई थी और 16 दिसंबर 1949 को आखिरी नमाज अदा की गई थी। शांर्श अदालत ने कहा, दस्तावेजों से पता चलता है कि 1885 से पहले हिंदू अंदर पूजा नहीं करते थे। बाहरी अहाते में रामचबूतरा सीता रसोई में पूजा करते थे।
कोर्ट ने कहा कि 1934 में दंगे हुए। उसके बाद से मुसलमानों का एक्सक्लूसिव अधिकार आंतरिक अहाते में नहीं रहा। 1949 दिसंबर तक मुस्लिम शुक्रवार को नमाज अदा करते थें। हिन्दू बाहर 1885 से चबूतरे पर पूजा करते थे। वहां नमाज और पूजा साथ-साथ होती रही। रेलिंग लगाना लगातार संघर्श और विवाद की गवाह है।
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाया। इस पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूशण और जस्टिस अब्दुल नजीर ने फैसला सुनाया। खास बात यह है कि यह फैसला पांचों जजों की सर्वसम्मति से सुनाया गया है।


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